महात्मा गांधी जी को सच्ची श्रद्धांजलि


 भारत के राष्ट्रपिता श्री मोहनचंद करमचंद गांधी जी का आज जन्म दिवस है इस अवसर पर मैं अपने समाज बंधुओं को एक नेक संदेश देना चाहता हूं दोस्तों आत्मा अजर अमर है हम लोग  यह  मानते हैं इह लोक व परलोक को मानने वाले सनातनी लोग हैं।
 इस अवसर पर हम यह जाने की हमारे मन को संतोष व सुख शांति कैसे मिल मिले व हमारे जीवन का लक्ष्य उद्देश्य क्या है।
 हर मानव का यह प्रथम दायित्व है कि वह अपने  इहलोक व  परलोक को ध्यान में रखकर हर अच्छे और बुरे कर्म को करने के बारे में सोचें।
 उल्लेखनीय है कि हम लोगों को यह मानव देह लख चौरासी योनिया भोगने के बाद मिली है हम इसमें ऐसा कोई अनुचित कार्य नहीं करें जिससे फिर हम लोगों को लख चौरासी  योनियों भोगने के लिए भटकना पड़े।
 हिंदुस्तान के महान सम्राट श्री अशोक जी ने जब कलिंग युद्ध को विजय कर लिया और उन्होंने लोगों की करुण पुकार व विधवा औरतों को देखा तो उनका हृदय करुणा से दहल गया और उन्होंने बौद्ध धर्म स्वीकार कर भिक्षुक बनकर जनता की भलाई के लिए अनेकों परमार्थ के कार्य किए।
 रामायण जी में कहां है सुमति कुमति सबके उर रहेही,नाथ पुराण  निगम अस गायही । इस चौपाई में विभीषण जी ने  अपने भ्राता रावण को समझा कर अपने हृदय की सुमति को जगाने का प्रस्ताव रखा था और उनसे कहा था जहां सुमति तहां संपत्ति नाना ,जहां कुमति ते विपत्ति  निदाना।
 हिंदुस्तान के अहिंसा के पुजारी गांधीजी जोकि राजनीति के क्षेत्र में विश्व में अपना एक महत्वपूर्ण इतिहास रच कर गए हैं आजकल यह देखने में आता है कि उनके लिए हमारे ही देशवासियों के विचार बड़े ही खराब नजर आते हैं।
 इस दिशा में हम सभी भारत वासियों को एक बार पुनः विचार करना होगा कि डेढ़ सौ वर्ष से पूर्व हमारे भारत के नव निर्माण में जितने भी लोगों ने इतिहास रचा है उन सभी महापुरुषों को हम देश का राष्ट्रपिता ही माने इस दिशा में हम लोगों को नई सोच रखकर भारतीय संसद में प्रस्ताव पारित करवाना होगा तभी लोगों के मन से जो महात्मा गांधी जी के प्रति दुर्भावना उठ रही है वह समाप्त हो पाएगी।
 बड़े ही खेद का विषय है कि  विश्व में आज अंतर्राष्ट्रीय  अहिंसा दिवस महात्मा गांधी जी की स्मृति में मनाया जाता है और हमारे ही देश के लोग जब महात्मा गांधी जी को गलत साबित करने में लगे हो तो यह खेद का विषय ही है आओ हम सब मिलकर इस विषय पर मंथन करके भारत के संविधान में कुछ नया इतिहास जुड़वाने का संकल्प लें।
 आत्मा अजर अमर है और इस सत्य को हमारे सभी धर्म ग्रंथों ने स्वीकार किया है गांधीजी भी परमात्मा के अंश ही थे और हम सभी भी परमात्मा के ही अंश हैं आओ इस विषय पर सार्थक पहल शुरू करें तभी महात्मा गांधी जी को सच्ची श्रद्धांजलि हो  पाएगी ।