मां भगवती आपके जीवन में छाए हुए घोर अंधेरे को मिटाएं । मैं मां भगवती से ऐसी कामना करता हूं ।संसार में हर पल वह हर क्षण जो भी घटित हो रहा है, उसके पीछे हम सबका कर्म ही जिम्मेदार है और परमात्मा व प्रभु ने कर्म को हम लोगों को करने का अधिकार दिया है। रामायण जी में साफ लिखा है :-
कर्म प्रधान विश्व करि राखा ।
जो जस करहिं तस फल चाखा ।।
अतार्थ - यदि हम बुरा कर्म कर रहे हैं तो हमें उसका बुरा फल ही मिलेगा । यदि हम अच्छा कर्म कर रहे हैं तो हमें उसका अच्छा फल ही मिलेगा।
कबीर दास जी ने भी अपनी लेखनी को चलाया और उन्होंने बहुत ही सुंदर सुंदर दोहों के द्वारा हर मनुष्य को सत्कर्म करने के लिए जागृत किया उन्होंने लिखा है:- बोए पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय ।यदि हम बबूल का पेड़ लगाएंगे तो उसमें आम कहां से होंगे। यदि हम उनकी इस बाणी का अनुसरण कर ले तो हम लोगों का जीवन धन्य हो सकता है।
कर्म के बंधन को यदि कोई इस संसार में शक्ति काट सकती है। तो वह मां भगवती की ही शक्ति है और मां भगवती को प्रसन्न करने के लिए नवरात्र के 9 दिनों से अच्छा संसार में कोई भी अवसर नहीं है। आओ इस अवसर को नहीं गवाएं और मां भगवती की भक्ति में लीन होकर अपने इस जीवन को धन्य बनाएं।
मां भगवती की भक्ति में लीन होकर अपने इस जीवन को धन्य बनाएं