कर्म प्रधान विश्व करि राखा


श्री भगवान की इस सृष्ठि मे मां सबसे बडी होती हैं । मां का आदर सत्कार करके हम अपने जीवन को धन्य बना सकते है। बडा ही खुशी का विषय है कि इस माह 7अक्टूम्बर 2019 तक नवरात्रो का पर्व है उसके बाद दिनांक 8 अक्टूम्बर को दशहरे (विजयदशमी ) का पर्व है उसके बाद दिपावली 
का पर्व दिनांक 25 को धनतेरस के साथ शुरू होकर 27 को मुख्य रूप से मां लक्ष्मीजी की    आराधना कर मनाया जायेगा व 28 को गोर्वधन पूजा व 29 को भैया दोज मनायी जायेगी । 
मां भगवती आपके जीवन में छाए हुए घोर अंधेरे को मिटाएं । मैं मां भगवती से ऐसी कामना करता हूं ।संसार में हर पल वह हर क्षण जो भी घटित हो रहा है ।  उसके पीछे हम सबका कर्म ही जिम्मेदार है और परमात्मा व प्रभु ने कर्म को हम लोगों को करने का अधिकार दिया है। रामायण जी में साफ लिखा है:-
कर्म प्रधान विश्व करि राखा ।
जो जस करहिं तस फल चाखा ।।
अतार्थ - यदि हम बुरा कर्म कर रहे हैं तो हमें उसका बुरा फल ही मिलेगा । यदि हम अच्छा कर्म कर रहे हैं तो हमें उसका अच्छा फल ही मिलेगा।
 कबीर दास जी ने भी अपनी लेखनी को चलाया और उन्होंने बहुत ही सुंदर सुंदर दोहों के द्वारा हर मनुष्य को सत्कर्म करने के लिए जागृत किया उन्होंने लिखा हैः- बोए पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय । यदि हम बबूल का पेड़ लगाएंगे तो उसमें आम कहां से होंगे। यदि हम उनकी इस बाणी  का अनुसरण कर ले तो हम लोगों का जीवन धन्य हो सकता है।
  कर्म के बंधन को यदि कोई इस संसार में शक्ति काट सकती है। तो वह मां भगवती की ही शक्ति है और मां भगवती को प्रसन्न करने के लिए नवरात्र के 9 दिनों से अच्छा संसार में कोई भी अवसर नहीं है। आओ इस अवसर को नहीं गवाएं और मां भगवती की भक्ति में लीन होकर अपने इस जीवन को  धन्य बनाएं।
यदि हम लोग मां कि भक्ति मे लीन हो जायेगे तो हम लोगो के पास किसी भी प्रकार का कोई अभाव नही रहेगा । हम यदि सुखी व सम्पन्न हो गये तो हम लोगो से दुख कोशो दूरी पर होगा। 
यदि हम समाज कि सेवा नही कर पा रहे है तो कोई बात नही है । मगर हम लोग जो लोग समाज सेवा कर रहे है उनके बीच मे समाज कंटक के रूप मे पेश नही हो तो यह भी एक प्रकार कि समाज सेवा ही है।कई लोग आज कल समाज कि पुरानी परम्पराओ पर उंगली उठाकर समाज के महान नेता बनना चाहते है । उन लोगो से मेरा इतना सा कहना है कि आप जो जैसा भी करेगे उसका परिणाम आपको जरूर मिलेगा ।परम्परा हम लोगो के जीवन जीने कि उमंग है। उस पर प्रश्न चिन्ह लगाकर अपने जीवन को दुखद नही बनाये । त्योहार हम लोगो कि शान है इन्हे खुशी व उमंग से मनाये ।