{23 अगस्त, 2006 खाद्य से संबंधित विधियों को समेकित करने और खाद्य पदार्थों के लिए विज्ञान आधारित मानक अधिकथित करने तथा उनके विनिर्माण, भंडारण, वितरण, विक्रय और आयात को विनियमित करने के लिए, मानव उपभोग के लिए सुरक्षित तथा स्वास्थ्यप्रद खाद्य की उपलब्धता सुनिश्चित करने, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की स्थापना करने, तथा उनसे संबंधित या उनके आनुषगिक विषयों का उपबंध करने के लिए अधिनियम भारत गणराज्य के सतावनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो
अध्याय । प्रारंभिक 1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ (1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 है। (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है। (3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे, और इस अधिनियम के भिन्न उपबन्धों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और ऐसे किसी उपबंध में इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस उपबंध के प्रवर्तन में आने के प्रति निर्देश है। 2. नियंत्रण की समीचीनता के संबंध में संघ द्वारा घोषणा-यह घोषणा की जाती है कि लोकहित में यह समीचीन है कि संघ को खाद्य उद्योग को अपने नियंत्रण में ले लेना चाहिए। 3. परिभाषाएं—(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, (क) “अपद्रव्य” से ऐसी कोई सामग्री अभिप्रेत है, जिसका उपयोग खाद्य को असुरक्षित या अवमानक या मिथ्या छाप वाला बनाने के लिए किया जाता है या किया जा सकता है या जिसमें बाह्य पदार्थ अंतर्विष्ट हैं; (ख) “विज्ञापन” से कोई श्रव्य या दृश्य प्रचार, किसी प्रकाश, ध्वनि, धुएं, गैस, मुद्रण, इलैक्ट्रानिक मीडिया, इंटरनेट या वैब साईट द्वारा किया गया रूपण या उद्घोषणा अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत किसी सूचना, परिपत्र, लेबल, लपेटन, बीजक या अन्य दस्तावेजों के माध्यम से प्रचार भी है; (ग) “अध्यक्ष” से खाद्य प्राधिकरण का अध्यक्ष अभिप्रेत है; (घ) “दावे” से ऐसा कोई अभ्यावेदन अभिप्रेत है, जिसमें यह कथन, सुझाव या विवक्षा की जाती है कि किसी खाद्य में उसके उद्भव, पोषक तत्व, प्रकृति, प्रसंस्करण, सम्मिश्रण या अन्यथा से संबंधित विशिष्ट क्वालिटियां हैं; (ङ) “खाद्य सुरक्षा आयुक्त” से धारा 30 के अधीन नियुक्त खाद्य सुरक्षा आयुक्त अभिप्रेत है; (च) “उपभोक्ता” से ऐसे व्यक्ति और कुटुम्ब अभिप्रेत हैं जो अपनी वैयक्तिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए खाद्य क्रय करते हैं या प्राप्त करते हैं(छ) “संदूषक” से ऐसा कोई पदार्थ अभिप्रेत है, चाहे वह खाद्य में मिलाया गया हो या नहीं किन्तु वह ऐसे खाद्य में ऐसे खाद्य के उत्पादन (जिसके अन्तर्गत कृषि कर्म, पशुपालन या पशु चिकित्सा औषधि में की गई संक्रियाएं भी हैं), विनिर्माण, प्रसंस्करण, निर्माण, उपचार, पैकिंग, पैकेजिंग, परिवहन या धारण करने के परिणामस्वरूप या पर्यावरणीय संदूषण के परिणामस्वरूप विद्यमान है और इसके अन्तर्गत कीट अवशेष, कृतंक रोम और अन्य बाह्य पदार्थ नहीं हैं(ज) “अभिहित अधिकारी” से धारा के 36 अधीन नियुक्त अधिकारी अभिप्रेत है; (झ) “बाह्य पदार्थ” से किसी खाद्य पदार्थ में अंतर्विष्ट कोई पदार्थ अभिप्रेत है, जो उसके विनिर्माण के लिए प्रयुक्त कच्ची सामग्री, पैकेजिंग सामग्री या प्रसंस्करण प्रणाली से आ सकता है या इसमें मिलाया जाता है, किन्तु ऐसा पदार्थ ऐसे खाद्य पदार्थ को असुरक्षित नहीं बनाता है;